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आर्मी अस्पताल में दुर्लभ ब्रेनस्टेम इम्प्लांट सफल, सैनिक की डेढ़ वर्षीय पुत्री को मिली सुनने की शक्ति

आर्मी हॉस्पिटल (R&R) ने सैनिक की डेढ़ वर्षीय पुत्री में दुर्लभ ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इम्प्लांट कर सुनने की शक्ति बहाल की। यह मिकेल एप्ले...

आर्मी हॉस्पिटल (R&R) ने सैनिक की डेढ़ वर्षीय पुत्री में दुर्लभ ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इम्प्लांट कर सुनने की शक्ति बहाल की। यह मिकेल एप्लेसिया जैसी गंभीर स्थिति में अत्यंत जटिल शल्यक्रिया थी।

नई दिल्ली, 16 जुलाई 2025। चिकित्सा विज्ञान की सीमा को लांघते हुए, आर्मी हॉस्पिटल रिसर्च एंड रेफरल (R&R) ने एक अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है। अस्पताल ने एक सैनिक की 1.8 वर्षीय पुत्री, जो जन्म से ही मिकेल एप्लेसिया से पीड़ित थी—एक ऐसी स्थिति जिसमें श्रवण तंत्रिका (Auditory Nerve) ही नहीं होती—में सफलतापूर्वक ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इम्प्लांट (ABI) किया है। यह भारत में की गई अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी में से एक मानी जा रही है।

यह सफलता AH R&R के विशेषज्ञों और प्रख्यात ईएनटी सर्जन पद्मश्री प्रोफेसर मोहन कामेश्वरन की टीम के संयुक्त प्रयासों से संभव हो सकी। यह अस्पताल भारत के उन गिने-चुने केंद्रों में से एक बन गया है, जहाँ इस अत्यंत तकनीकी और संवेदनशील सर्जरी को सफलता पूर्वक अंजाम दिया गया है।

ऑडिटरी ब्रेनस्टेम इम्प्लांट उन रोगियों के लिए एकमात्र विकल्प है जिनके पास कार्यशील श्रवण तंत्रिका ही नहीं होती। परंपरागत कॉकलियर इम्प्लांट ऐसे मामलों में असफल रहते हैं, क्योंकि वे श्रवण तंत्रिका के माध्यम से मस्तिष्क को ध्वनि संकेत भेजते हैं, जो इस स्थिति में अनुपस्थित होती है। ABI मस्तिष्क के ब्रेनस्टेम को सीधे ध्वनि संकेत भेजता है, जिससे सुनने की क्षमता प्राप्त होती है।

सैनिकों और उनके परिवारों की सेवा में समर्पित भारतीय सेना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उनके स्वास्थ्य संस्थान न केवल समर्पण और सेवा भावना के प्रतीक हैं, बल्कि चिकित्सा नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी हैं।

शल्यक्रिया के बाद बच्ची की स्थिति स्थिर है और विशेषज्ञों की निगरानी में सुनने की पुनःप्रशिक्षण प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो वह जल्द ही ध्वनियों की दुनिया में कदम रख सकेगी—जो अब तक उसके लिए मौन की कैद रही।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सर्जरी भविष्य में ऐसे बच्चों और वयस्कों के लिए आशा की किरण बन सकती है, जिनके पास कोई श्रवण तंत्रिका नहीं है और जिनके लिए अब तक कोई इलाज उपलब्ध नहीं था।

यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी कौशल नहीं, बल्कि समर्पण, करुणा और विज्ञान की शक्ति का प्रतीक है। इस सर्जरी से यह भी सिद्ध होता है कि जब राष्ट्रीय संस्थान, विशेषज्ञता और जनसेवा एक साथ आते हैं, तो चमत्कार संभव है।

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