Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Pages

Classic Header

{fbt_classic_header}

Top Ad

ब्रेकिंग :

latest

Ads

Girl in a jacket

नक्सल शांति वार्ता: सरकार की नीति या महज प्रोपेगेंडा?

  नक्सल शांति वार्ता: सरकार की नीति या महज प्रोपेगेंडा? रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा शांति वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बाद सिया...

 नक्सल शांति वार्ता: सरकार की नीति या महज प्रोपेगेंडा?

रायपुर: छत्तीसगढ़ में नक्सलियों द्वारा शांति वार्ता का प्रस्ताव दिए जाने के बाद सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वार्ता किसी विशेष एजेंडे के तहत न हो। उन्होंने कहा, "अगर नक्सलियों की ओर से कोई ठोस निर्णय आया है, तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, लेकिन सरकार इसे केवल प्रचार का माध्यम न बनाए।"

इस बीच, प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि नक्सलियों से वार्ता केवल बिना शर्त होगी। उन्होंने कहा, "सरकार की प्राथमिकता शांति और विकास है। नक्सलियों से किसी भी प्रकार की बातचीत बिना किसी शर्त के होगी। ऑपरेशन कगार के चलते नक्सली बैकफुट पर हैं, इसलिए वे वार्ता की बात कर रहे हैं। लेकिन सरकार किसी भी तरह का समझौता केवल जनहित में ही करेगी।"


राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज:

नक्सल समस्या को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। जहां कांग्रेस इसे सरकार की रणनीति पर सवाल उठाने का मौका मान रही है, वहीं भाजपा इसे अपनी सख्त नीति की सफलता बता रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हाल के अभियानों के बाद नक्सलियों की स्थिति कमजोर हुई है, जिससे वे वार्ता के लिए मजबूर हुए हैं। हालांकि, इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और वास्तविक उद्देश्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि सरकार और नक्सली वार्ता की ओर किस दिशा में बढ़ते हैं और क्या यह प्रयास स्थायी शांति की ओर ले जा सकेगा या फिर यह केवल एक राजनीतिक दांव-पेंच भर रह जाएगा।






कोई टिप्पणी नहीं

Girl in a jacket