जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव टालने पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वाकआउट और गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना: रायपुर : जिला पंचायत अध्यक्ष और ...
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव टालने पर विधानसभा में हंगामा, विपक्ष का वाकआउट और गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना:
रायपुर : जिला पंचायत अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव टालने के मुद्दे पर आज विधानसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ। विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए सदन से वाकआउट किया और गांधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के इस विरोध को शांत कराने के लिए वित्त मंत्री ओपी चौधरी और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर उन्हें मनाने पहुंचे, लेकिन कांग्रेस विधायकों ने सरकार से सदन में जवाब देने की मांग की।
शून्यकाल में गूंजा जिला पंचायत चुनाव का मुद्दा:
शून्यकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों अनिला भेंडिया और सावित्री मंडावी ने जिला पंचायत चुनाव टाले जाने का मुद्दा उठाया। इस पर कांग्रेस नेता उमेश पटेल ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा, "जहां-जहां कांग्रेस के सदस्य अधिक हैं, वहां चुनाव को जानबूझकर टाला जा रहा है। सत्ता पक्ष विपक्षी सदस्यों की खरीद-फरोख्त कर लोकतंत्र की मूल भावना को कुचल रहा है।"
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि "दुर्ग में एक जिला पंचायत सदस्य को शासकीय तौर पर 'गायब' करवा दिया गया, जिससे चुनाव निर्विरोध हो सके। यह लोकतंत्र का चीरहरण है।"
विपक्ष का वाकआउट और गांधी प्रतिमा के समक्ष धरना:
सरकार की चुप्पी से नाराज विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया और गांधी प्रतिमा के समक्ष धरने पर बैठ गया। कुछ देर बाद विपक्षी विधायक नेता प्रतिपक्ष के कक्ष में एकत्र हुए और आगे की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान भूपेश बघेल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि "राज्य सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का दुरुपयोग कर रही है। कई जिलों में प्रशासनिक दखलंदाजी कर चुनाव की तारीखें बदली जा रही हैं, जिससे भाजपा को फायदा हो सके।"
विपक्ष को मनाने पहुंचे मंत्री, सरकार से जवाब की मांग:
धरना जारी रहने पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी और भाजपा विधायक अजय चंद्राकर विपक्ष को मनाने पहुंचे और उन्हें कार्यवाही में शामिल होने का आग्रह किया। हालांकि, कांग्रेस विधायकों ने सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की और कहा कि जब तक सदन में इस मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट नहीं होता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
विधानसभा में जारी इस हंगामे ने यह साफ कर दिया कि जिला पंचायत चुनाव का मुद्दा राजनीतिक तकरार का बड़ा कारण बन चुका है। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं का दमन कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को निराधार बता रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या विपक्ष की मांगों पर कोई ठोस जवाब आता है या नहीं।
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