बालोद में रेत माफिया बेखौफ: जागरूक ग्रामीणों ने पकड़ी अवैध जेसीबी और हाईवा: बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में नदियों से रेत चोरी का खेल...
बालोद में रेत माफिया बेखौफ: जागरूक ग्रामीणों ने पकड़ी अवैध जेसीबी और हाईवा:
बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में नदियों से रेत चोरी का खेल लगातार जारी है, जबकि प्रशासनिक अधिकारी इस पर कोई सख्त कदम उठाने में विफल नजर आ रहे हैं। हाल ही में नेवारीकला गांव के जागरूक ग्रामीणों ने रेत चोरी का बड़ा मामला उजागर किया। उन्होंने रात के अंधेरे में अवैध खनन में लगी जेसीबी और हाईवा को पकड़ लिया और इसकी सूचना प्रशासन को दी।
प्रशासन की निष्क्रियता बनी रेत माफियाओं की ताकत:
बालोद जिले में लंबे समय से रेत माफिया सक्रिय हैं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण अवैध खनन का यह गोरखधंधा लगातार फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, खनिज विभाग और राजस्व विभाग को इस अवैध गतिविधि की पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अधिकारी मौन बने हुए हैं, जिससे रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
ग्रामीणों की सतर्कता से हुआ खुलासा:
नेवारीकला गांव के ग्रामीणों ने जब रात के समय संदिग्ध गतिविधियां देखीं, तो उन्होंने एकजुट होकर मौके पर दबिश दी। अवैध रूप से रेत खनन में लगी जेसीबी और हाईवा को पकड़ने के बाद उन्होंने प्रशासन को सूचित किया, लेकिन कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इससे नाराज ग्रामीणों ने खुद ही अवैध खनन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
बैठक में हुआ समझौता, बढ़ सकता है अवैध खनन:
पकड़ी गई जेसीबी और हाईवा को लेकर पंचायत स्तर पर बैठक हुई, जिसमें समझौते की स्थिति बनी। हालांकि, यह समझौता रेत माफियाओं को और अधिक बढ़ावा देने का संकेत देता है, जिससे भविष्य में अवैध खनन के मामले बढ़ सकते हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल:
स्थानीय लोगों ने प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर अधिकारी इसी तरह चुप्पी साधे रहेंगे, तो उन्हें खुद ही अपनी नदियों की रक्षा के लिए आगे आना पड़ेगा। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल ठोस कदम उठाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।
क्या प्रशासन अब जागेगा?
अब देखना होगा कि इस मामले के बाद प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर ग्रामीणों को ही अपनी सुरक्षा और संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष करना पड़ेगा। बालोद में रेत चोरी का यह मामला प्रशासनिक उदासीनता और जनता की जागरूकता के बीच जारी संघर्ष को उजागर कर रहा है।
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