• पोलमपल्ली आवासीय पोटाकेबिन में हड़कंप, 20 छात्राओं का इलाज जारी, एक जिला अस्पताल रेफर; कलेक्टर ने गठित की तीन सदस्यीय जांच टीम : सुकमा : ...
• पोलमपल्ली आवासीय पोटाकेबिन में हड़कंप, 20 छात्राओं का इलाज जारी, एक जिला अस्पताल रेफर; कलेक्टर ने गठित की तीन सदस्यीय जांच टीम :
सुकमा : नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को सुरक्षित आवास और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित पोटाकेबिन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले के पोलमपल्ली आवासीय पोटाकेबिन में कुम्हड़े की सब्जी खाने के बाद 50 से अधिक छात्राएं उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत के साथ बीमार हो गईं। प्रारंभिक जांच में फूड पॉइजनिंग के लक्षण सामने आने की बात कही गई है।
जानकारी के अनुसार 26 अगस्त को छात्राओं को सुबह, दोपहर और रात, तीनों समय कुम्हड़े की सब्जी परोसी गई थी। देर रात से कई छात्राओं की तबीयत बिगड़ने लगी। बुधवार और गुरुवार को छात्रावास परिसर में ही उनका उपचार किया गया, लेकिन हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर छात्राओं को दोरनापाल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया।
शुक्रवार और शनिवार को लगातार छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के बाद कई छात्राएं स्वस्थ होकर वापस पोटाकेबिन लौट चुकी हैं, जबकि शनिवार तक करीब 20 छात्राओं का इलाज जारी था। एक छात्रा की हालत गंभीर होने पर उसे बेहतर उपचार के लिए सुकमा जिला अस्पताल रेफर किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार सभी छात्राएं फिलहाल खतरे से बाहर हैं।
बीएमओ ने बताए फूड पॉइजनिंग के लक्षण
कोंटा बीएमओ डॉ. दीपेश चंद्राकर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में छात्राओं में फूड पॉइजनिंग के लक्षण पाए गए हैं। प्रभावित छात्राओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया है। कई छात्राएं स्वस्थ होकर वापस छात्रावास लौट चुकी हैं, जबकि अन्य का इलाज जारी है।
कलेक्टर पहुंचे पोटाकेबिन, जांच टीम गठित
घटना की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर अमित कुमार ने पहले जिला अस्पताल पहुंचकर भर्ती छात्रा का हालचाल जाना। इसके बाद वे पोलमपल्ली पोटाकेबिन पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली।
कलेक्टर ने परिसर की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, भोजन की गुणवत्ता और प्राथमिक उपचार कक्ष में उपलब्ध दवाओं का निरीक्षण किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोंटा एसडीएम सुभाष शुक्ला की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं।
एक अधीक्षिका पर करीब 600 बच्चों की जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार पोलमपल्ली पोटाकेबिन की क्षमता 500 बच्चों की है और यहां लगभग 500 छात्राएं रह रही हैं। इसी परिसर में 100 सीटर आरएमएसए हॉस्टल भी संचालित है। दोनों संस्थानों की जिम्मेदारी कथित तौर पर एक ही अधीक्षिका के पास है।
इस तरह करीब 600 बच्चों की सुरक्षा, भोजन, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी एक व्यक्ति के भरोसे होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं पोटाकेबिन भवन के जर्जर होने की बात भी सामने आई है।
चार महीने से बिना प्रमुख के जिला शिक्षा मिशन
जिले में शिक्षा व्यवस्था की मॉनिटरिंग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मिशन समन्वयक उमाशंकर तिवारी 30 अप्रैल को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन चार महीने बाद भी नए डीएमसी की नियुक्ति नहीं हुई है। वहीं बीआरसी का पद भी पिछले दो माह से रिक्त बताया गया है।
जिला मिशन कार्यालय में डीएमसी, एपीसी और बीआरसी जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के कारण शिक्षा और आवासीय संस्थानों की निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।
अब तीन सदस्यीय जांच समिति भोजन, पेयजल, स्वच्छता और छात्रावास की अन्य व्यवस्थाओं की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के बाद ही छात्राओं के बीमार होने की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी तय हो सकेगी।


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