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बस्तर राजमहल में निभाई गई रक्षाबंधन की सदियों पुरानी परंपरा, ग्रामीणों ने बांधी राखी

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नेतानार, चितापुर और कोलेंग के ग्रामीण पहुंचे राजमहल, राजपरिवार के साथ निभाया आत्मीयता और संरक्षण का पारंपरिक रिश्ता :

जगदलपुर : रक्षाबंधन के अवसर पर बस्तर राजमहल में रियासतकाल से चली आ रही ऐतिहासिक परंपरा एक बार फिर निभाई गई। ग्राम नेतानार, चितापुर और कोलेंग के ग्रामीण रक्षाबंधन के अवसर पर जगदलपुर स्थित राजमहल पहुंचे और राजपरिवार के सदस्यों को राखी बांधकर सदियों पुराने पारंपरिक रिश्ते को आगे बढ़ाया।


बताया जाता है कि रियासतकाल से इन ग्रामीण अंचलों और बस्तर राजपरिवार के बीच आत्मीयता एवं पारस्परिक संरक्षण का विशेष संबंध रहा है। रक्षाबंधन के दिन ग्रामीणों द्वारा राजमहल पहुंचकर रक्षा सूत्र बांधना इसी ऐतिहासिक परंपरा का हिस्सा है। बदलते समय के बावजूद यह परंपरा आज भी पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही है।

राजमहल पहुंचने वाले ग्रामीणों का पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान ग्रामीणों और राजपरिवार के सदस्यों के बीच आत्मीय मुलाकात हुई तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की गई।



रक्षाबंधन का यह आयोजन बस्तर की विशिष्ट सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को भी दर्शाता है। यहां राखी का पर्व केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि आपसी विश्वास, सम्मान और संरक्षण की भावना से जुड़े पारंपरिक संबंधों की अभिव्यक्ति भी है।

ग्रामीणों ने बताया कि राजमहल में राखी बांधने की यह परंपरा उनके लिए केवल एक रस्म नहीं, बल्कि पूर्वजों से मिली विरासत और बस्तर की ऐतिहासिक संस्कृति से जुड़ा एक भावनात्मक रिश्ता है।

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